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किसी से मोहब्बत हम, निभाएं तो कैसे निभाएं
हर तरफ हैं कांटे, खुद को बचाएं तो कैसे बचाएं
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रहना है इस शहर में, तो अपनी फितरत बदल डालो
#अजनबी शहर में, अपनी झूठ की इबारत बदल डालो
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आज क्यों हैं ये आंसू यूं छलछलाते हुए
गुज़र गयीं मुद्दतें किसी को भुलाते हुए
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ज़िंदगी का ये #सफर, तमाम अब होने को है
गुज़र गया ये दिन भी, शाम अब होने को है
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लेते हैं हर चीज़ मेरी, अपना सामान समझ कर,
जब मांगते हैं हम, तो देते है अहसान समझ कर !
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इस #दिल में, मोहब्बत की शमा जलती रही ,
यादों का बोझ लिए, ये ज़िन्दगी चलती रही !
आता रहा जलजला ज़माने भर का लेकिन,
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फरेबियों को तो हम, अपना समझ बैठे
हक़ीक़त को तो हम, सपना समझ बैठे
मुकद्दर कहें कि वक़्त की शरारत कहें,
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ये दुनिया तो आखिर, हम छोड़ जाएंगे,
मगर चाहतों को, बदस्तूर छोड़ जाएंगे !
जिन्दा थे तो #याद करते रहे उनकी हम,
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आज तो भरे बाज़ार में, वफ़ा नीलम हो गयी !
बस देखते ही देखते, #ज़िन्दगी बेनाम हो गयी !
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अपनी ज़िन्दगी हम, यूं ही बसर कर लेंगे,
अपने दिल में हम, उनके अज़ाब भर लेंगे...
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