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कंकरीली राहों की कशक, आज भी ताज़ा है,
गरम रेत की वो तपिश, आज भी ताज़ा है !
फटी बिबाइयों का वो कशकता
खामोश दर्द,
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जिसने सिखाया प्यार करना,
आज सिखा रहा है दूर रहना...
कभी
खामोशी पर खफा होता था,
आज खुद
खामोश रहकर हमें
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न करता कोई याद, तो ख़ुद ही याद कर लो ,
टूटे हुए रिश्तों को, फिर से आबाद कर लो !
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कभी नफरतों में तुम, प्यार ढूंढो तो बात बने ,
कभी
खामोशियों का, राज़ ढूंढो तो बात बने !
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दुनिया के दिए ज़ख्मों को, सहना ही पड़ता है,
खा कर के ठोकरें भी, हमें चलना ही पड़ता है !
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कहीं ज़िंदगी हमारी, बदतर न हो जाए
कहीं ये दिल हमारा, पत्थर न हो जाये
उगाते रहिये फसलें ग़म या ख़ुशी की,
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पहाडीयों की तरह #
खामोश हैं,
आज के संबंध और #रिश्ते;
जब तक हम न पुकारें,
उधर से #आवाज ही नहीं आती !!!
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मेरी चाहत ने उसे #खुशी दे दी,
बदले में उसने मुझे सिर्फ
खामोशी दे दी...
खुदा से #दुआ मांगी मरने की,
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हवा में अनजान सा डर, बसा क्यों है,
हर लम्हा ज़िन्दगी का, खफा क्यों है !
गुज़रती हैं स्याह रातें करवटें बदलते,
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कुछ देर की
खामोशी है,
फिर #शोर आयेगा,,,
तुम्हारा सिर्फ़ वक्त आया है,
हमारा दौर आयेगा !!!
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