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कभी हमदम बनाते हैं, कभी नफरत दिखाते हैं
कभी
आँखें मिलाते हैं, कभी
आँखें दिखाते हैं
उनकी अदा है बस ऐसी,
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फूलों की महक या कांटों की खरास लिखूँ
या अपनों से बिगड़ते रिश्तों की खटास लिखूँ
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आँखें बेचैन रहती हैं, उनको पलकों में छुपाने के लिये
मन तड़पता रहता है, बस उनका प्यार पाने के लिये
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प्यार का रास्ता
आँखों से होकर गुजरता है
क्योंकि हुस्न
आँखों से ही दिल में उतरता है
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दिल जीत ले उनका वो नज़र कहां से लायें
दिल में सिर्फ हम हों वो असर कहां से लायें
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आग तो सूरज उगलता है, पर धरती तड़पती है
गुनाह तो
आँखें करती हैं, पर छाती धड़कती है
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उल्फ़त के मारों से, मेरी दास्तां मत कहना
कभी तलबगारों से, मेरी दास्तां मत कहना
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उनके नख़रे उठा पाना, गर मेरे बस में होता
मैं तो उन्हीं का हो जाता, गर मेरे बस में होता
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उम्र भर संभाली जो मोहब्बत की तानें,
कब टूट जाएं ये किसको पता है
मोहब्बत की राहों में वफ़ाओं के साये,
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प्यार की दास्तां, किसी से भला क्या कहिये
खुदगर्ज़ दुनिया से, अपने अज़ाब क्या कहिये
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